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Solar Project 2026: Ghar, Kua aur Factory ke liye Bumper Subsidy | Zero Bill ka Pura Ganit (Full Guide)

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Solar Mahagranth 2026: Ghar, Khet aur Factory ka Pura Hisab | Subsidy, Technical & ROI Guide (5000 Words)

Solar Revolution 2026: Ghar, Kua (Agriculture) aur Factory ke liye Ultimate Guide – Subsidy, Technicals & ROI Analysis

👋 राम राम सा! (Ram Ram Sa!)

खम्मा घणी मेरे प्यारे भाई-बंधुओं और बुजुर्गों! मैं हूँ आपका अपना देसी ब्लॉगर, और आज मैं कोई छोटी-मोटी बात नहीं करने वाला। आज हम बात करेंगे "सूरज की खेती" की।

थे तो जाणो ही हो (आप तो जानते ही हो), हमारे राजस्थान में तावड़ो (धूप) केड़ो तेज पड़े है। दुनिया तरसती है सूरज देखने को, और हमारे यहाँ जेठ-वैशाख में सूरज भगवान साक्षात अग्नि बरसाते हैं। जब कुदरत ने हमें इतना बड़ा खजाना दिया है, तो हम डिस्कॉम (बिजली विभाग) के महँगे बिल भरकर अपनी जेब क्यों खाली कर रहे हैं?

आज की यह पोस्ट 5000 शब्दों का एक 'महाग्रंथ' है। इसमें मैं आपको एक इंजीनियर की तरह सोलर पैनल की तकनीक समझाऊँगा, एक सीए (CA) की तरह सब्सिडी और टैक्स का गणित बताऊँगा, और एक किसान की तरह खेत की सच्चाई बताऊँगा। चाय का बड़ा कप साथ रख लीजो, क्योंकि जानकारी बहुत गहरी (Deep) और विस्तृत होने वाली है।

मित्रों, 2026 आ चुका है। दुनिया बदल रही है। पेट्रोल-डीजल के भाव आसमान छू रहे हैं और कोयले की कमी से बिजली संकट गहरा रहा है। ऐसे में, अगर आज आपने सोलर नहीं अपनाया, तो कल पछतावा होगा। चाहे आप एक गृहिणी हों जो घर का खर्चा बचाना चाहती हैं, एक किसान हों जो रात में सांप-बिच्छू के डर से मुक्त होकर दिन में सिंचाई करना चाहता है, या एक फैक्ट्री मालिक हों जो अपनी ऑपरेटिंग कॉस्ट कम करना चाहता है – यह गाइड सबके लिए है।

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खंड 1: घर और मकान के लिए (Residential Sector) – PM Surya Ghar Yojana 2.0

सबसे पहले बात करते हैं 'घर' की। हर महीने बिजली का बिल आता है तो माथे पर चिंता की लकीरें आ जाती हैं। गर्मियों में AC चलाने से पहले दस बार सोचना पड़ता है। लेकिन अब चिंता छोड़ो, PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana 2026 में नए अवतार में आ गई है।

1.1 योजना का पूरा सच (The Complete Truth)

2024 में शुरू हुई इस योजना ने 2026 तक आते-आते बहुत सारे सुधार किए हैं। पहले सब्सिडी का गणित प्रतिशत (%) में था, जिससे लोग कंफ्यूज होते थे। अब सरकार ने इसे फिक्स (Fixed) कर दिया है।

योजना का मुख्य उद्देश्य है – 1 करोड़ घरों को मुफ्त बिजली देना। इसका मतलब यह नहीं है कि आपके घर का कनेक्शन कट जाएगा। इसका मतलब है कि आप अपनी छत पर बिजली बनाओगे, अपनी जरूरत पूरी करोगे, और बची हुई बिजली सरकार को बेचोगे। इसे कहते हैं 'Net Metering'।

1.2 Technical Deep Dive: 1kW, 2kW या 3kW? कैसे चुनें?

अक्सर लोग पूछते हैं – "भाईसाहब, मेरे घर के लिए कितना किलोवाट काफी है?" इसका जवाब कोई एक शब्द में नहीं दे सकता। आपको अपनी खपत (Consumption) देखनी होगी।

🔬 इंजीनियर की डायरी: लोड कैलकुलेशन (Load Calculation)

सोलर सिस्टम आपकी "Sanctioned Load" (स्वीकृत भार) या "Bill Unit Consumption" पर निर्भर करता है।

  • 1 किलोवाट (1kW): अगर आपका महीने का बिल ₹800 से ₹1000 तक आता है (लगभग 100-120 यूनिट)। इसमें आप पंखे, लाइट, टीवी और फ्रिज चला सकते हैं। AC नहीं चलेगा।
  • 2 किलोवाट (2kW): अगर बिल ₹1500 से ₹2000 है। इसमें आप 1 टन का इनवर्टर AC दिन में 4-5 घंटे चला सकते हैं।
  • 3 किलोवाट (3kW - The Best Choice): अगर बिल ₹2500 से ₹3500 है। यह "स्वीट स्पॉट" है। इसमें आप 1.5 टन का AC, वाशिंग मशीन, फ्रिज, सब कुछ चला सकते हैं। सरकार सबसे ज्यादा सब्सिडी भी इसी पर दे रही है।

मेरा तकनीकी सुझाव: हमेशा अपनी जरूरत से 20% बड़ा सिस्टम लगवाएं, क्योंकि 5-10 साल बाद पैनल की एफिशिएंसी थोड़ी कम होती है और घर में उपकरण बढ़ जाते हैं।

1.3 Subsidy Table 2026 (Residential)

यहाँ देखिए पक्का हिसाब। यह वो पैसा है जो सरकार आपके खाते में डीबीटी (DBT) के माध्यम से डालेगी।

सिस्टम क्षमता औसत बाजार मूल्य (₹) केन्द्र सरकार की सब्सिडी (₹) आपकी जेब से लगेगा (₹) ROI (पैसा वसूली)
1 kW ₹60,000 - ₹70,000 ₹30,000 ₹30,000 - ₹40,000 2.5 साल
2 kW ₹1,10,000 - ₹1,20,000 ₹60,000 ₹50,000 - ₹60,000 2.8 साल
3 kW (Recommended) ₹1,60,000 - ₹1,80,000 ₹78,000 ₹82,000 - ₹1.02 Lakh 3 साल
3 kW से ऊपर प्रति किलोवाट बढ़ेगा ₹78,000 (Fixed Max) पूरा खर्च आपका 3.5 - 4 साल
⚠️ जरूरी चेतावनी: सब्सिडी केवल तभी मिलेगी जब आप DCR (Domestic Content Requirement) वाले सोलर पैनल लगवाएंगे। यानी सोलर सेल और मॉड्यूल दोनों "Made in India" होने चाहिए। अगर वेंडर ने सस्ता चाइनीज माल चिपका दिया, तो सब्सिडी भूल जाओ। बिल पर चेक करें "DCR Compliant"।
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खंड 2: खेती और कुआ (Agriculture) – PM KUSUM Yojana (Component B)

अब आते हैं असली मुद्दे पर – हमारे अन्नदाता। राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में पानी नीचे जा रहा है। ट्यूबवेल अब 400 फीट से 700 फीट गहरे हो गए हैं। बिजली का कनेक्शन (3-Phase) मिलने में सालों लग जाते हैं। ऐसे में PM KUSUM Yojana (Component B) किसी वरदान से कम नहीं है।

2.1 कुसुम योजना क्या है? (सरल भाषा में)

इस योजना में सरकार कहती है – "डीजल पंप हटाओ, सोलर पंप लगाओ"। इसमें किसान को पंप की कुल कीमत का केवल 10% देना होता है। बाकी 90% में से 30% केंद्र सरकार देती है, 30% राज्य सरकार देती है और 30% बैंक लोन देता है (जिसे किसान को चुकाना है)।

2.2 Technical Selection: पंप का चयन कैसे करें?

किसान भाई अक्सर यहाँ गलती करते हैं। वे दुकानदार के कहने पर कोई भी पंप ले आते हैं। आपको "Head" (गहराई) और "Water Discharge" (पानी की मात्रा) का विज्ञान समझना होगा।

🔬 पंप टेक्नोलॉजी (AC vs DC)

1. DC Surface Pump: यह उन जगहों के लिए है जहाँ पानी सतह पर है (नहर, तालाब या 20-30 फीट कुआ)। इसमें मोटर DC करंट से चलती है।

2. AC Submersible Pump (सबसे ज्यादा प्रचलित): राजस्थान में यही चलता है। इसमें सोलर का DC करंट VFD (Variable Frequency Drive) कंट्रोलर के जरिए AC में बदला जाता है। यह मोटर बहुत शक्तिशाली होती है।

तकनीकी सूत्र (Formula):
अगर आपका कुआ 300 फीट गहरा है, तो आपको कम से कम 5HP या 7.5HP का पंप चाहिए। 3HP का पंप 200 फीट से नीचे पानी नहीं उठा पाएगा (या बहुत कम पानी देगा)।

USPC (Universal Solar Pump Controller): 2026 में आने वाले नए पंपों में USPC लगा है। इसका फायदा यह है कि जब आप सिंचाई नहीं कर रहे, तो आप इसी सोलर सिस्टम से अपनी आटा चक्की, कुट्टी मशीन (Chaff Cutter) या घर की लाइट चला सकते हैं। यह "आम के आम, गुठलियों के दाम" वाली बात है।

2.3 Subsidy List for Farmers (2026)

पंप क्षमता (HP) प्रकार कुल लागत (अनुमानित) सब्सिडी (60%) किसान अंश (10% + 30% Loan)
3 HP AC Submersible ₹2,30,000 ₹1,38,000 ₹92,000 (बिना लोन)
5 HP AC Submersible ₹3,20,000 ₹1,92,000 ₹1,28,000 (बिना लोन)
7.5 HP AC Submersible ₹4,50,000 ₹2,70,000 ₹1,80,000 (बिना लोन)
10 HP AC Submersible ₹5,80,000 (राज्य पर निर्भर) पूरा पैसा (ज्यादातर जगह)
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खंड 3: फैक्ट्री और कमर्शियल (Industrial Solar) – High ROI Project

फैक्ट्री, स्कूल, हॉस्पिटल, कोल्ड स्टोरेज या वेयरहाउस मालिकों के लिए सोलर लगवाना एक विशुद्ध "बिजनेस डिसीजन" है। यहाँ हम भावनाओं की नहीं, बैलेंस शीट (Balance Sheet) की बात करेंगे।

3.1 क्यों लगवाएं फैक्ट्री में सोलर?

  1. High Tariff Rates: कमर्शियल बिजली ₹10 से ₹12 प्रति यूनिट पड़ती है (डिमांड चार्ज मिलाकर)। सोलर से यह कॉस्ट ₹3.5 से ₹4.5 (LCOE) आती है।
  2. Accelerated Depreciation (AD Benefit): यह सबसे बड़ा "हिडन बेनिफिट" है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 32 के तहत, आप सोलर प्रोजेक्ट की लागत का 40% पहले ही साल में डेप्रिसिएशन के रूप में क्लेम कर सकते हैं।
    उदाहरण: अगर आपने ₹50 लाख का प्लांट लगाया, तो आपकी टैक्सेबल इनकम में से ₹20 लाख सीधे कम हो जाएंगे। अगर आप 30% टैक्स स्लैब में हैं, तो सीधे ₹6 लाख का टैक्स बच गया।

3.2 CAPEX vs RESCO Model (गहराई से समझें)

मार्केट में दो मॉडल चलते हैं:

  • CAPEX (Capital Expenditure): इसमें फैक्ट्री मालिक खुद पैसा लगाता है। पूरा रिस्क और पूरा रिवॉर्ड (बचत) उसका। ROI 3-4 साल में आ जाती है। यह सबसे बेस्ट मॉडल है।
  • RESCO (Renewable Energy Service Company): इसे 'OPEX' भी कहते हैं। इसमें कोई तीसरी कंपनी आपकी छत पर फ्री में सोलर लगाती है। वो आपसे बिजली का पैसा लेती है (जैसे ₹5/यूनिट, फिक्स 25 साल के लिए)। इसमें आपका ₹0 खर्च होता है, लेकिन आप 25 साल के लिए एग्रीमेंट (PPA) में बंध जाते हैं। अगर आपके पास कैश फ्लो है, तो CAPEX ही चुनें।
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खंड 4: टेक्निकल मास्टरक्लास (Technical Components Guide)

अब मैं आपको वो जानकारी दूँगा जो वेंडर आपसे छुपाते हैं। अगर आप 5 लाख या 50 लाख खर्च कर रहे हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि माल क्या लग रहा है।

4.1 Solar Panels: Poly, Mono या Bifacial?

बाजार में तीन तरह के पैनल मिलते हैं:

  1. Polycrystalline (नीले वाले): यह पुरानी तकनीक है (Old Gen)। इनकी एफिशिएंसी 16-17% है। ये सस्ते होते हैं लेकिन इन्हें ज्यादा जगह चाहिए। 2026 में इन्हें लगवाना "नोकिया 1100" खरीदने जैसा है।
  2. Mono-PERC (काले वाले): यह अभी का स्टैण्डर्ड है। इनमें 'Passivated Emitter and Rear Cell' तकनीक होती है। ये कम रोशनी (Low Light) और बादल होने पर भी बिजली बनाते हैं। एफिशिएंसी 20-21%।
  3. Bifacial (दोनों तरफ वाले): यह भविष्य है। इसमें पीछे की तरफ भी ग्लास होता है। छत या जमीन से टकराकर जो रोशनी पीछे पड़ती है, उससे भी बिजली बनती है। ये 10-20% ज्यादा बिजली देते हैं। मेरी सलाह है – Bifacial TopCon Technology (570Wp+) ही लगवाएं।

4.2 Inverter: सिस्टम का दिल

पैनल तो शरीर है, लेकिन इन्वर्टर 'दिल' है। अगर इन्वर्टर खराब, तो सब बंद।

  • String Inverter: घर और छोटी फैक्ट्रियों के लिए। इसमें कई पैनल की सीरीज (String) जुड़ती है।
  • Micro Inverter: इसमें हर पैनल के नीचे एक छोटा इन्वर्टर लगता है। अगर एक पैनल पर छाया आई, तो बाकी पैनल काम करते रहेंगे। यह महंगा है लेकिन एफिशिएंसी सबसे ज्यादा है।

Expert Tip: इन्वर्टर में हमेशा Remote Monitoring (Wifi Dongle) जरूर लें ताकि आप मोबाइल पर देख सकें कि आज कितनी यूनिट बनी।

4.3 Structure & Mounting (ढांचा)

राजस्थान में आंधियां 100-120 किमी/घंटा की रफ़्तार से चलती हैं। अगर स्ट्रक्चर कमजोर हुआ, तो पैनल पतंग की तरह उड़ जाएंगे।

  • कभी भी पेंट किया हुआ लोहा (Black Pipe) न लगवाएं।
  • हमेशा Hot Dipped Galvanized Iron (HDGI) मांगें। इसमें जिंक की मोटी परत (80 माइक्रोन) होती है जो 25 साल तक जंग नहीं लगने देती।
  • फास्टनर्स (Nut-Bolt) हमेशा Stainless Steel (SS-304) ग्रेड के होने चाहिए।
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📢 म्हारो निजी अनुभव और सलाह (My Expert Personal Experience)

भाइयों, मैंने पिछले 5 सालों में सैकड़ों प्रोजेक्ट्स को लगते हुए और बिगड़ते हुए देखा है। मेरे अनुभव का निचोड़ यहाँ है:

1. छाया का खेल (Shadow Analysis):
एक बार मेरे एक मित्र ने सोलर लगवाया। सब कुछ बढ़िया था, लेकिन दोपहर 3 बजे पड़ोसी की पानी की टंकी की परछाई सिर्फ एक पैनल के कोने पर आती थी। आपको लगेगा कि "एक ही तो पैनल है", लेकिन सोलर में सब सीरीज में जुड़े होते हैं। एक पैनल पर छाया मतलब पूरी स्ट्रिंग का करंट डाउन। इसे Mismatch Loss कहते हैं। साइट सर्वे के समय धयान दें कि सुबह 9 से शाम 4 बजे तक कोई छाया न हो।

2. सफाई है कमाई (Cleaning is Earning):
कुचामन, नागौर, जोधपुर में धूल बहुत है। अगर पैनल पर मिट्टी की परत जम गई, तो उत्पादन 30% तक गिर सकता है। लोग 5 लाख का सिस्टम लगाते हैं लेकिन ₹500 का वाइपर नहीं खरीदते। हर 10-15 दिन में सुबह-सुबह पैनल धोना बहुत जरूरी है।

3. अर्थिंग में कंजूसी नहीं (Earthing Safety):
वेंडर अक्सर पैसे बचाने के लिए केमिकल अर्थिंग की जगह कोयला-नमक डाल देते हैं। यह गलत है। सोलर को 3 अलग-अलग अर्थिंग (DC, AC, Lightning Arrester) चाहिए। अर्थिंग रेजिस्टेंस 2 ओहम से कम होना चाहिए। आकाशीय बिजली (Lightning) लाखों का नुकसान कर सकती है, इसलिए ESE लाइटनिंग अरेस्टर जरूर लगवाएं।

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खंड 5: आवेदन प्रक्रिया (Step-by-Step Process)

Ghar (Residential) के लिए:

  1. Registration: सबसे पहले pmsuryaghar.gov.in पर जाएं। अपना राज्य, जिला और बिजली वितरण कंपनी (जैसे JVVNL/AVVNL) चुनें।
  2. Account Number: अपना बिजली बिल का K-Number या Account Number डालें।
  3. Apply: लॉगिन करके रूफटॉप सोलर के लिए अप्लाई करें।
  4. Feasibility: डिस्कॉम के अधिकारी आकर चेक करेंगे कि आपके मीटर और ट्रांसफार्मर पर लोड खाली है या नहीं।
  5. Installation: अप्रूवल मिलने के बाद, किसी भी रजिस्टर्ड वेंडर से प्लांट लगवाएं।
  6. Net Meter: प्लांट लगने के बाद डिस्कॉम वाले नेट-मीटर (Bi-directional meter) लगाएंगे।
  7. Subsidy: मीटर लगने के बाद कमिशनिंग रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड होगी और 30 दिन में सब्सिडी सीधे आपके बैंक खाते में आ जाएगी।

Kisan (Kusum) के लिए:

  1. Portal: राजस्थान के किसान Raj Kisan Sathi Portal पर जन-आधार (Jan-Aadhaar) से लॉगिन करें।
  2. Form: बागवानी या कृषि विभाग के सेक्शन में सोलर पंप का फॉर्म भरें।
  3. Documents: जमाबंदी (6 महीने से पुरानी न हो), नक्शा, सिंचाई जल स्रोत का प्रमाण पत्र अपलोड करें।
  4. Payment: नंबर आने पर आपको अपना 10% हिस्सा डिमांड ड्राफ्ट (DD) या ऑनलाइन जमा करना होगा।
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खंड 6: भविष्य की तकनीक (Future Trends)

2026 के बाद क्या होगा?

  • Solar + Battery Storage: अभी बैटरियां महंगी हैं, लेकिन लिथियम-आयन बैटरियों के दाम गिर रहे हैं। आने वाले समय में "Hybrid System" चलेगा, जहाँ रात में भी सोलर की बिजली यूज होगी।
  • Agrivoltaics: खेतों में पैनल को 10-12 फीट ऊपर लगाकर नीचे खेती करना। इससे फसल भी होगी और बिजली भी।
  • Floating Solar: बड़े तालाबों या डिग्गियों में तैरते हुए सोलर पैनल। इससे पानी का वाष्पीकरण (Evaporation) कम होता है।
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FAQs: आपके हर सवाल का विस्तृत जवाब

1. अगर बिजली (Grid) चली गई तो क्या मेरा सोलर सिस्टम चलेगा?

यह सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल है। जवाब है – नहीं (अगर यह On-Grid सिस्टम है)। सुरक्षा कारणों से, जैसे ही ग्रिड की लाइट जाती है, इन्वर्टर अपने आप बंद हो जाता है। इसे Anti-Islanding कहते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अगर कोई लाइनमैन खंभे पर तार ठीक कर रहा हो, तो आपके घर से करंट वापस जाकर उसे झटका न दे दे। अगर आपको लाइट जाने पर भी बिजली चाहिए, तो आपको 'Hybrid Inverter' और बैटरी लगवानी पड़ेगी।

2. सोलर पैनल की वारंटी और गारंटी में क्या अंतर है?

पैनल पर दो तरह की वारंटी होती है:
Product Warranty (10-12 साल): अगर पैनल में कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट आ जाए, ग्लास टूट जाए या फ्रेम उखड़ जाए।
Performance Warranty (25 साल): कंपनी गारंटी देती है कि 25 साल बाद भी पैनल 80% बिजली बनाएगा। यह लीनियर डिग्रेडेशन (Linear Degradation) वारंटी होती है।

3. क्या बन्दर या ओले (Hailstorm) पैनल तोड़ सकते हैं?

सोलर पैनल के ऊपर Tempered Glass (Toughened) होता है। यह 3.2mm मोटा होता है। यह 25mm (एक इंच) तक के ओले जो 80km/h की रफ़्तार से गिरें, उन्हें झेल सकता है। बन्दरों के कूदने से यह नहीं टूटता, जब तक कि वे पत्थर न मारें। फिर भी, सुरक्षा के लिए आप बंदरों से बचाव वाली जाली लगवा सकते हैं।

4. नेट मीटरिंग में 'बैंकिंग' (Banking) क्या होती है?

मान लीजिये सर्दियों में (जनवरी में) आपने बिजली ज्यादा बनाई (Export 400 यूनिट) और खर्च कम की (Import 100 यूनिट)। तो बची हुई 300 यूनिट डिस्कॉम अपने पास "जमा" (Bank) कर लेता है। अब गर्मियों (मई) में जब आप AC चलाएंगे और आपका सोलर कम पड़ेगा, तो वो जमा की हुई 300 यूनिट वापस एडजस्ट हो जाएंगी। यह साल भर का चक्र चलता है (अप्रैल से मार्च)।

5. क्या किरायेदार (Tenant) सब्सिडी ले सकता है?

नहीं। सब्सिडी का नियम है कि बिजली का मीटर और छत का मालिकाना हक़ (Registry/Patta) एक ही व्यक्ति के नाम होना चाहिए। अगर आप किरायेदार हैं, तो आपको मकान मालिक को समझाकर उनके नाम से लगवाना होगा।

6. सोलर पैनल को किस दिशा (Direction) में लगाना चाहिए?

भारत उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में है, इसलिए पैनल का मुँह हमेशा दक्षिण (South) दिशा में होना चाहिए। राजस्थान के लिए आदर्श कोण (Tilt Angle) लगभग 23 से 27 डिग्री है। इससे साल भर सबसे ज्यादा धूप मिलती है।

7. लोन (Loan) की क्या सुविधा है?

लगभग सभी सरकारी बैंक (SBI, PNB, BOB) सोलर के लिए लोन देते हैं। ब्याज दर होम लोन के आसपास (8.5% - 9.5%) होती है। इसे चुकाने की अवधि 3 से 5 साल होती है। कुछ बैंक बिना कोलेटरल (बिना कुछ गिरवी रखे) भी 3 लाख तक का लोन देते हैं।

8. क्या मैं अपने पुराने इन्वर्टर-बैटरी को सोलर में बदल सकता हूँ?

हाँ, इसे "Retrofitting" कहते हैं। इसके लिए आपको एक "Solar Charge Controller" अलग से खरीदना होगा जो आपके पुराने इन्वर्टर और बैटरी को सोलर पैनल से जोड़ देगा। यह सस्ता जुगाड़ है, लेकिन इसकी एफिशिएंसी कम होती है। नया सोलर इन्वर्टर लेना बेहतर है।

9. DCR और Non-DCR पैनल के रेट में क्या फर्क है?

DCR (भारतीय) पैनल थोड़े महंगे होते हैं (लगभग ₹2-3 प्रति वाट ज्यादा)। लेकिन चूंकि सब्सिडी केवल DCR पर मिलती है, इसलिए घर के लिए DCR ही सस्ता पड़ता है। नॉन-सब्सिडी प्रोजेक्ट्स (फैक्ट्री) के लिए लोग Non-DCR (Imported) लेते हैं क्योंकि वो थोड़े सस्ते और ज्यादा एफिशिएंट होते हैं।

10. क्या सोलर पैनल से रेडिएशन (Radiation) निकलता है?

यह एक कोरा मिथक (Myth) है। सोलर पैनल से कोई हानिकारक रेडिएशन नहीं निकलता। यह बिल्कुल सुरक्षित है। आप इसके नीचे आराम से सो सकते हैं या बैठ सकते हैं।

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निष्कर्ष (Conclusion)

तो दोस्तों, यह था सोलर ऊर्जा का पूरा कच्चा-चिट्ठा। मैंने कोशिश की है कि आपको एक ही पोस्ट में इतनी जानकारी दे दूँ कि आपको किसी और वेबसाइट पर जाने की जरूरत न पड़े।

सारांश (Summary):

  • घर के लिए: 3kW का सिस्टम लगवाएं, ₹78,000 की सब्सिडी लें और बिजली फ्री करें।
  • खेत के लिए: कुसुम योजना में 90% छूट का लाभ उठाएं और दिन में सिंचाई करें।
  • फैक्ट्री के लिए: 40% डेप्रिसिएशन का लाभ लें और बिजली बिल को मुनाफे में बदलें।

मारवाड़ में कहते हैं – "बीत्या टेम पाछो कोनी आवे" (बीता समय वापस नहीं आता)। यह स्कीम अभी चालू है, पता नहीं कब नियम बदल जाएं या फंड खत्म हो जाए। इसलिए समझदारी दिखाएं और आज ही अपनी छत को 'पावर प्लांट' बनाएं।

अगर आपके मन में अभी भी कोई सवाल है, कोई शंका है, तो नीचे कमेंट बॉक्स खुला है। मैं (आपका भाई, कृष्ण पाल सिंह) खुद हर कमेंट का जवाब दूँगा।

जय राजस्थान, जय हिन्द! 🇮🇳☀️